झुबैर हंगरगेकर

पुणे से ‘अल-कायदा’ तक धागा! झुबैर हंगरगेकर की गिरफ्तारी के बाद साथियों ने जला दिए सबूत

पुणे | गुरुवार, 6 नवंबर 2025

पुणे से एक बार फिर आतंक से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र एटीएस ने अल-कायदा से संबंध रखने वाले झुबैर हंगरगेकर को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे चौकाने वाली हैं। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसके साथियों ने सबूत मिटाने की कोशिश की — यहां तक कि कई अहम दस्तावेज़ों को जलाकर नष्ट कर दिया गया।

झुबैर की गिरफ्तारी के बाद हड़कंप

एटीएस की कार्रवाई के बाद पूरे पुणे शहर में हलचल मच गई। झुबैर हंगरगेकर ‘अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ कि उसके साथियों ने शहर के काळेपडळ इलाके में कुछ अहम कागज़ात इकट्ठे करके उन्हें आग के हवाले कर दिया।

एटीएस ने मौके से कुछ अधजले दस्तावेज़ बरामद किए हैं। सीसीटीवी फुटेज में झुबैर का एक साथी रिक्शे से आते हुए और फाइलें जलाते हुए साफ दिखाई दे रहा है।

जांच में निकला अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

तफ्तीश के दौरान एटीएस को झुबैर के मोबाइल से कुछ ऐसे नंबर मिले हैं, जिनका लिंक पाकिस्तान, सऊदी अरब, कुवैत और ओमान तक फैला हुआ है। जांचकर्ताओं को शक है कि ये संपर्क किसी बड़े मॉड्यूल से जुड़े हो सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि झुबैर लगातार पूछताछ के दौरान बातें छुपाने की कोशिश कर रहा है। उसके पुराने मोबाइल में भी कुछ समान नंबर मिले, जिससे उसकी भूमिका और गहरी होती जा रही है।

एटीएस को मदरसे से मिले सबूत

एटीएस की टीम ने झुबैर के साथी की निशानदेही पर काळेपडळ के एक मदरसे में छापा मारा। वहां से उन्हें कुछ अर्धजली फाइलें और डिजिटल डिवाइस बरामद हुए हैं। शुरुआती जांच में इन फाइलों में कुछ विदेशी नाम और बैंकिंग ट्रांजैक्शन का ज़िक्र मिला है।

सिमी से जुड़े साथी

जांच एजेंसियों के मुताबिक झुबैर के कुछ करीबी साथी पहले सिमी (SIMI) संगठन से जुड़े रह चुके हैं, जिसे केंद्र सरकार ने पहले ही प्रतिबंधित कर रखा है।

अब एटीएस यह पता लगाने की कोशिश में है कि झुबैर और उसके ग्रुप का मकसद क्या था, और जली हुई फाइलों में ऐसा क्या था जिसे छुपाने की इतनी जल्दी थी।

2.35 लाख रुपये की जांच जारी

एटीएस को झुबैर के घर से ₹2 लाख 35 हज़ार रुपये मिले हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह रकम कहां से आई और किस काम में इस्तेमाल होनी थी। जांच अधिकारी मानते हैं कि यह रकम किसी गुप्त नेटवर्क फंडिंग से जुड़ी हो सकती है।

न्यायालय में पेशी और अगली कार्रवाई

मंगलवार को झुबैर को विशेष न्यायाधीश एस. आर. साळुंखे की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसकी पुलिस कस्टडी 14 नवंबर तक बढ़ा दी गई है।

एटीएस अब झुबैर के विदेशी संपर्कों, पैसों के स्रोत और मदरसे से मिले डिजिटल सबूतों की फॉरेंसिक जांच करवा रही है।

निष्कर्ष

पुणे में सामने आई यह गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती है। एटीएस अब इस मामले को आतंकवाद से जुड़ी बड़ी साजिश के तौर पर देख रही है। आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं, जो इस पूरी साजिश की असल तस्वीर सामने लाएंगे।

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