मुंबई | 5 नवंबर 2025: महाराष्ट्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नागरी क्षेत्रों में लागू तुकडेबंदी कायदा (कानून) को रद्द कर दिया है। इस फैसले से लाखों जमीनों और घरों के अटके हुए सौदे अब वैध हो जाएंगे। राज्यभर के करीब 49 लाख परिवारों और लगभग दो करोड़ लोगों को इसका सीधा फायदा मिलने जा रहा है।
कई सालों से अटके थे लाखों जमीन के सौदे
राज्य में तुकडेबंदी कायदा (कानून) कई दशकों से लागू था। इस कानून के तहत, किसी जमीन के छोटे-छोटे हिस्सों में बंटवारा या बिक्री करना मना था। कानून का उद्देश्य कृषि भूमि को टूटने से बचाना था ताकि खेती पर असर न पड़े।
लेकिन समय के साथ शहरों का विस्तार बढ़ा और नागरी इलाकों में लोगों ने छोटे-छोटे प्लॉट खरीदने शुरू किए। कई सौदे हुए, लेकिन तुकडेबंदी कानून के कारण उन्हें कानूनी मंजूरी नहीं मिल पाई। नतीजतन, ऐसे लाखों परिवारों के नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सके।
सरकार ने जारी किया नया अध्यादेश
3 नवंबर 2025 को राज्य सरकार ने ‘महाराष्ट्र जमीन विभाजन रोकथाम और एकत्रीकरण अधिनियम’ में सुधार करते हुए नया अध्यादेश जारी किया।
राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने मंत्रालय में पत्रकार परिषद आयोजित कर बताया कि यह सुधार नागरिकों के लिए एक ऐतिहासिक राहत लेकर आया है।
अब पुराने सौदे होंगे बिना शुल्क के वैध
मंत्री बावनकुळे ने कहा कि 15 नवंबर 1965 से लेकर 15 अक्टूबर 2024 के बीच हुए सभी तुकडेबंदी से जुड़े सौदे बिना कोई शुल्क लिए एक बार के लिए नियमित किए जाएंगे।
जिन लोगों की जमीनें पहले ही खरीदी-बेची गई थीं, लेकिन कानून के कारण उनके नाम 7/12 रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाए, अब उन सभी के नाम मालिकी हक के साथ दर्ज किए जाएंगे।
नोटरी वाले सौदों को भी मिलेगा हक
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन सौदों में केवल नोटरी करवाई गई थी, उन नागरिकों को अपने संबंधित उप-पंजीयक (Sub-Registrar) कार्यालय में जाकर सौदे की आधिकारिक रजिस्ट्री करानी होगी। इसके बाद उनके नाम पर वह जमीन पूरी तरह कानूनी मानी जाएगी।
नागरी क्षेत्रों के लिए कानून हटाने का कारण
दरअसल, यह कानून खेती की जमीन के बंटवारे को रोकने के लिए बनाया गया था ताकि जमीन की उत्पादकता बनी रहे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
शहरों के फैलाव के कारण कई कृषि क्षेत्र अब नगर सीमाओं में आ गए हैं, जहां छोटे-छोटे प्लॉटों की बिक्री सामान्य बात है। ऐसे में पुराने कानून के कारण शहरी विकास और संपत्ति के लेनदेन पर रोक लग रही थी। इसी वजह से राज्य सरकार ने नागरी इलाकों से यह कानून हटाने का निर्णय लिया।
किन इलाकों को मिलेगा तुकडेबंदी कानून का फायदा
यह अध्यादेश महानगरपालिका, नगर परिषद, नगर पंचायत, और एमएमआरडीए, पीएमआरडीए, एनएमआरडीए जैसे विशेष योजना प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले सभी इलाकों में लागू होगा।
इसके अलावा, यूडीसीपीआर (UDCPR) के तहत आने वाले शहरों और गांवों के आस-पास के सभी क्षेत्रों को भी इस निर्णय का लाभ मिलेगा।
49 लाख परिवारों को सीधा फायदा
सरकार के अनुसार, इस फैसले से करीब 49 लाख परिवारों और लगभग दो करोड़ नागरिकों को राहत मिलेगी। जिनकी जमीनों के लेनदेन वर्षों से अटके थे, अब वे कानूनी रूप से मान्य होंगे।
इसके साथ ही शहरी विकास, संपत्ति का हस्तांतरण, वारसाहक अधिकार और आवास योजनाओं के कार्यों को भी नई गति मिलेगी।
भूमि मामलों के विशेषज्ञों की राय
भूमि मामलों के जानकार मानते हैं कि यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता लाएगा। इससे भूमि विवादों में कमी आएगी और आम लोगों को उनकी संपत्ति पर कानूनी स्थिरता मिलेगी।
महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला न केवल लाखों परिवारों को राहत देने वाला है, बल्कि इससे शहरी विकास के कामों में भी तेजी आएगी। वर्षों से अटके हुए संपत्ति के सौदे अब वैध बनेंगे और नागरिकों को अपनी जमीन और घर पर पूरा अधिकार मिलेगा। यह निर्णय सचमुच “जनहित” में लिया गया बड़ा कदम कहा जा सकता है।





