ग्लोबल वार्मिंग

ग्लोबल वार्मिंग – UN का अलार्म: जलवायु योजनाओं के बावजूद पृथ्वी की गर्मी बढ़ने की आशंका

नई दिल्ली | 5 नवंबर 2025

ग्लोबल वार्मिंग: संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि विश्व के कई देशों द्वारा जलवायु नियंत्रण के लिए किए गए वादों और योजनाओं के बावजूद दुनिया इस सदी के अंत तक खतरनाक गर्मी की ओर बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि 1.5°C से ज्यादा तापमान वृद्धि मानव जीवन और प्रकृति दोनों के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है।

वैश्विक तापमान की चिंता

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की नई रिपोर्ट दर्शाती है कि बड़े प्रदूषण फैलाने वाले देश अभी भी ग्रीनहाउस गैसों में पर्याप्त कमी नहीं ला पाए हैं।

अगर वर्तमान राष्ट्रीय नीतियों को पूरी तरह लागू भी कर लिया जाए, तो 2100 तक पृथ्वी का तापमान 2.3°C से 2.5°C तक बढ़ सकता है। यह स्थिति पर्यावरण और मानव जीवन दोनों के लिए गंभीर खतरा मानी जा रही है।

1.5°C की सीमा पार होना अब तय

वैज्ञानिकों का कहना है कि औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर की तुलना में 1.5°C से अधिक वृद्धि होने पर गंभीर जलवायु संकट आ सकते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगले कुछ सालों में यह सीमा पार होने की संभावना बहुत ज्यादा है।

वैश्विक उत्सर्जन 2024 में नया रिकॉर्ड बनाकर और बढ़ चुका है, जो दिखाता है कि कई वादों के बावजूद वास्तविक कार्रवाई धीमी है।

UN के प्रमुख की अपील

UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि “मिशन सरल है लेकिन चुनौतीपूर्ण – जो भी अतिरिक्त तापमान बढ़ा है, उसे जितनी जल्दी हो सके कम करना आवश्यक है।”

उन्होंने देशों से आग्रह किया कि वे उत्सर्जन में तेजी से कटौती करें और तापमान को 1.5°C के पास बनाए रखें।

महत्वाकांक्षा और कार्रवाई में कमी

रिपोर्ट की मुख्य वैज्ञानिक संपादक एने ओलहॉफ ने कहा कि दुनिया भर में वर्तमान महत्वाकांक्षा और कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।

UNEP के आकलन के अनुसार, हाल ही में घोषित वादों से तापमान पर सिर्फ मामूली असर पड़ा है, लेकिन यह स्थायी या पर्याप्त नहीं है।

गर्म होती पृथ्वी के खतरे

  • रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि तापमान 2°C तक बढ़ गया तो इसका असर पूरी पृथ्वी पर दिखाई देगा।
  • 1.4°C वृद्धि पर ही अधिकांश उष्णकटिबंधीय प्रवाल भित्तियाँ खतरे में हैं।
  • 2°C वृद्धि से अमेज़न वर्षावन और आर्कटिक ग्लेशियरों में स्थायी बदलाव हो सकते हैं।
  • समुद्र का स्तर बढ़ेगा और तूफान व बाढ़ जैसी आपदाएं और भी गंभीर होंगी।

COP30 सम्मेलन और वैश्विक प्रतिक्रिया

ब्राज़ील के बेलें शहर में इस हफ्ते COP30 जलवायु सम्मेलन शुरू होने जा रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बैठक महत्वपूर्ण होगी क्योंकि कई बड़े देश अभी तक अपने पुराने उत्सर्जन लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाए हैं।

अगर मौजूदा नीतियां जारी रहीं, तो सदी के अंत तक पृथ्वी का औसत तापमान 2.8°C तक पहुंच सकता है।

ग्लोबल वार्मिंग – जिम्मेदार देश और वैश्विक दबाव

G20 देशों ने कुल वैश्विक उत्सर्जन का लगभग तीन-चौथाई योगदान किया है। इनमें से सिर्फ यूरोपीय संघ ने 2024 में उत्सर्जन कम किया।

भारत, चीन, रूस और इंडोनेशिया में उत्सर्जन में वृद्धि हुई।

अमेरिका की जलवायु नीति अनिश्चित बनी हुई है और अगर यह पेरिस समझौते से बाहर निकलता है तो वैश्विक प्रगति पर असर पड़ेगा।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं हुआ तो कई “टिपिंग पॉइंट्स” पार हो जाएंगे। इसका मतलब है कि कुछ परिवर्तन स्थायी और अनियंत्रित हो जाएंगे।

निष्कर्ष

UN की यह रिपोर्ट साफ कर देती है कि दुनिया जलवायु संकट से निपटने में अभी भी पीछे है।

अगर बड़े देश जिम्मेदारी नहीं निभाते और उत्सर्जन में तेज़ कटौती नहीं करते, तो इस सदी के अंत तक धरती 2.5°C तक गर्म हो सकती है। यह मानव जीवन, पारिस्थितिकी और कृषि दोनों के लिए खतरनाक साबित होगी।

Hindinewser

Hindi Newser Desk

हिंदी न्यूज़र, हिंदी और अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ का एक समर्पित समूह है। टीम राजनीति, व्यवसाय और मार्केट, टेक्नोलॉजी, मनोरंजन, खेल, विज्ञान, पर्यावरण और वैश्विक खबरों पर ताज़ा और विश्वसनीय जानकारी पाठकों को प्रदान करती है। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, भरोसेमंद और पठनीय न्यूज़ पहुँचाना है।

tukadebandi kayada 2025

महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: तुकडेबंदी कायदा खत्म, अब 49 लाख परिवारों की जमीनें होंगी कानूनी

aaj ka rashifal 06 november 2025

06 नवम्बर 2025 राशिफल: गुरुवार विशेष आज का राशिफल

Gallery

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31