अंकारा / इस्लामाबाद, 30 अक्टूबर 2025।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान तनाव: के बीच हालिया सीमा तनाव के बीच एक राहत भरी ख़बर आई है। तुर्किये में हुई वार्ता के दौरान दोनों देशों ने कम से कम सात दिनों तक युद्धविराम बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह जानकारी तुर्की के विदेश मंत्रालय ने साझा की है।
मंत्रालय ने कहा कि दोनों पड़ोसी देश 6 नवंबर को इस्तांबुल में फिर मिलेंगे, जहाँ शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और सीज़फायर लागू करने की रणनीति पर चर्चा होगी। इस पूरे समझौते में क़तर और तुर्किये मध्यस्थ के रूप में भूमिका निभा रहे हैं।
एक सप्ताह की राहत, लेकिन दोनों देशों में चुनौतियाँ बाकी
पिछले कुछ हफ़्तों में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण रहे। अफगानिस्तान में हुए कुछ विस्फोटों के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर गोलाबारी और हवाई हमले हुए थे।
इस दौरान पाकिस्तान ने दावा किया कि उसकी कार्रवाई में 200 से अधिक अफगान लड़ाके मारे गए, जबकि काबुल प्रशासन ने कहा कि उनके जवाबी हमलों में 58 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई।
2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद यह सबसे बड़ा सीमा संघर्ष माना जा रहा है।
निगरानी व्यवस्था और नियम तय होंगे
तुर्की विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा कि दोनों पक्षों ने एक संयुक्त मॉनिटरिंग और वेरिफिकेशन सिस्टम तैयार करने पर सहमति दी है। इस व्यवस्था के तहत युद्धविराम का पालन सुनिश्चित किया जाएगा और यदि कोई पक्ष उल्लंघन करता है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
इस्तांबुल बैठक में इस निगरानी तंत्र को लागू करने के साथ-साथ भविष्य की शांति वार्ताओं का खाका भी तय किया जाएगा।
पाकिस्तान की मुख्य चिंता – TTP पर कार्रवाई
वार्ता का पहला दौर इस्तांबुल में पिछले सप्ताह शुरू हुआ था, लेकिन बुधवार को वह रुक गया क्योंकि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से मांग की थी कि वह अपनी ज़मीन पर तेहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ सख्त कदम उठाए।
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान में बैठे TTP के सदस्य पाकिस्तान में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहे हैं, जबकि अफगान सरकार लगातार यह कहती आई है कि वह किसी भी आतंकी संगठन को संरक्षण नहीं दे रही।
अफगान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने बयान में कहा कि “दोनों पक्षों के बीच बातचीत सकारात्मक रही और आगे भी चर्चा जारी रहेगी।”
पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की गई है।
सीमाओं पर जारी है सख़्त निगरानी
दोनों देशों के बीच लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा (ड्यूरंड लाइन) फैली है, जो लंबे समय से अस्थिरता का कारण रही है।
यह इलाका सीमा पार हमलों, तस्करी और शरणार्थियों से जुड़ी समस्याओं के चलते लगातार सुर्खियों में रहता है।
पाकिस्तान का कहना है कि वह अपने उत्तरी सीमाई इलाकों में सुरक्षा मजबूत कर रहा है, जबकि अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तानी ड्रोन और तोपखाने की फायरिंग से उसके नागरिक क्षेत्रों को नुकसान हुआ है।
मध्यस्थ देशों की भूमिका अहम
विश्लेषकों का मानना है कि तुर्किये और क़तर ने इस संकट में निष्पक्ष मध्यस्थता निभाई है। 19 अक्टूबर को दोहा में दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने पहली बार युद्धविराम पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन यह ज़्यादा दिन नहीं टिक सका था।
अब दोनों देशों को उम्मीद है कि इस्तांबुल बैठक से स्थायी शांति का रास्ता निकलेगा।
फिलहाल इस एक सप्ताह का युद्धविराम दोनों देशों के लिए तनाव घटाने का एक मौका है। विश्लेषक मानते हैं कि अगर दोनों पक्ष अपने सैनिकों को पीछे हटाने और सीमा पर गश्त कम करने पर सहमत होते हैं, तो यह स्थायी समझौते की नींव साबित हो सकता है।
हालांकि, यह तभी संभव है जब अफगानिस्तान पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को स्वीकार करे और TTP पर ठोस कार्रवाई का भरोसा दे।





