कीवी फल की खेती: स्वास्थ्य लाभ और मुनाफे का शानदार व्यवसाय
आज के समय में हमारे भारत में एक बहुत ही खास फल देखने को मिल रहा है। यह फल एक विदेशी फल है जिसका नाम कीवी फल है। आपको बता दें, इस फल की खेती (Kiwi Fruit Farming) के लिए सबसे अनुकूल समय है जनवरी का महीना। कीवी फल स्पेन, फ्रांस, चिली, जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इटली, अमेरिका और चीन जैसे देशों में सबसे ज्यादा उगाया जाता है। इस संदर्भ में बताते चलूं कि कीवी फल में विटामिन बी और सी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।
कीवी की खेती का व्यवसाय
कीवी फल (Kiwi Fruit) एक विदेशी फल है लेकिन इससे स्वास्थ्य लाभों का भी उपभोग किया जा सकता है। यही वजह है कि यह फल आज के समय में लोगों के व्यंजन में एक खास स्थान बना चुका है। इसमें विटामिन सी, ई, फाइबर, कॉपर, सोडियम, एंटीऑक्सीडेंट और पोटैशियम पाया जाता है। विशेष रूप से, कीवी में विटामिन सी की मात्रा संतरे से कई गुना ज्यादा होती है, जिससे यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। हालांकि, कीवी की खेती करना आसान काम नहीं है।
कीवी की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी और भूमि की तैयारी
अगर आप कीवी फल की खेती का व्यवसाय करना चाहते हैं, तो आपको ऐसी भूमि का चयन करना होगा जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था हो। यह व्यवसाय के लिए सबसे बेहतर है। कीवी की खेती के लिए उपजाऊ, गहरी, अच्छी जल निकासी वाली, दोमट या बलुई दोमट मिट्टी आवश्यक होती है। कीवी फलों की लताओं के विकास के लिए ऐसी भूमि जरूरी है जहाँ पानी रुकता न हो, क्योंकि अत्यधिक नमी पौधों को नुकसान पहुँचा सकती है।
ऐसी भूमि जिसमें 0.25 पीपीएम से कम बोरॉन, सोडियम लवण और 0.75 से कम विद्युत चालकता हो तथा पीएच 7.3 से कम हो, कीवी की खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। मिट्टी तैयार करने के बाद दिसंबर माह में खाद और गड्ढे भरने का कार्य किया जाता है।
कीवी की खेती – व्यवसाय से जुड़ी खास बातें
- कीवी की खेती के लिए साल में जनवरी का महीना सबसे अच्छा माना जाता है।
- कीवी फल को चीन में “चाइनीज आंवला” कहा जाता है।
- कीवी फल पौष्टिकता के कारण लोगों में काफी लोकप्रिय है।
- भारत में सबसे पहले कीवी फल की खेती 1960 में बैंगलोर में की गई थी।
- कीवी पौधे नर और मादा दो प्रकार के होते हैं।
- बीजू के पौधे पर नवोदित या ग्राफ्टिंग द्वारा पौधे तैयार किए जाते हैं।
- सही तकनीक से खेती करने पर कीवी का व्यवसाय लाखों रुपये का मुनाफा दे सकता है।
कीवी की खेती के लिए बुवाई और रोपण
कीवी पौधों के बीच की दूरी लगभग 6 मीटर रखनी चाहिए। वहीं, लाइन से लाइन की दूरी लगभग 4 मीटर तक होनी चाहिए। यह एक बेल वाला पौधा है, इसलिए नर और मादा दोनों प्रकार के पौधे लगाने होते हैं। हर 9 मादा पौधों पर एक नर पौधा लगाया जाता है। एक हेक्टेयर भूमि में लगभग 415 पौधे लगाए जा सकते हैं।
कीवी की खेती में पौधों की सिंचाई
कीवी के पौधों को गर्मी के मौसम में अधिक पानी की आवश्यकता होती है। गर्मी के दिनों में हर 10 से 15 दिन में खेत में पानी देना जरूरी है। अच्छी सिंचाई से मिट्टी की उपज क्षमता बढ़ती है और उत्पादन भी अच्छा होता है। शुरुआती दिनों में, विशेषकर सितंबर और अक्टूबर के महीने में सिंचाई पर ध्यान देना आवश्यक है।
कीवी की खेती में होने वाले रोग और रोकथाम
कीवी के बागों में सामान्यतः कॉलर रोट, रूट रोट और क्राउन रोट जैसी बीमारियाँ देखने को मिलती हैं। ये रोग प्रायः फंगस के कारण होते हैं और बरसात या गर्मी के मौसम में तेजी से फैलते हैं। इनसे पत्तियाँ मुरझा जाती हैं, शाखाएँ सूख जाती हैं और पौधे की जड़ सड़ने लगती है। इससे बचाव के लिए खेत में पानी का जमाव नहीं होने देना चाहिए और जल निकासी की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
कीवी फलों की तुड़ाई और भंडारण
कीवी फल सामान्यतः अक्टूबर से दिसंबर के बीच पकते हैं। इस समय अन्य फलों की कमी होती है, जिससे बाज़ार में इनकी अच्छी मांग रहती है। कीवी फल को तोड़ते समय यह सख्त अवस्था में होना चाहिए ताकि ट्रांसपोर्टेशन में नुकसान न हो। दूर के बाजारों में भेजने के लिए इनकी अच्छी पैकिंग जरूरी है। कीवी फलों को एक महीने तक सामान्य तापमान पर और लगभग 4 महीने तक कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा जा सकता है।





