मुंबई में सोमवार शाम फिल्म जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई — मशहूर अभिनेता गोवर्धन असरानी, जिन्हें दर्शक प्यार से असरानी के नाम से जानते हैं, का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
वे पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार थे और इलाज के दौरान उन्होंने आखिरी सांस ली।
उनके निधन की खबर से बॉलीवुड से लेकर आम दर्शकों तक, हर किसी की आंखें नम हो गईं।
55 सालों का असरानी का शानदार सफर
असरानी ने अपने करियर की शुरुआत 1960 के दशक में की थी और जल्द ही हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा कॉमिक चेहरों में शामिल हो गए।
‘शोले’ के मज़ेदार जेलर से लेकर ‘चुपके चुपके’, ‘गोलमाल’, ‘आँधी’, और ‘अभिमान’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी अदाकारी का अनोखा जादू बिखेरा।
हास्य भूमिकाओं के साथ-साथ उन्होंने कई गंभीर किरदारों में भी अपनी अभिनय क्षमता साबित की।
उनकी कॉमिक टाइमिंग, संवाद अदायगी और चेहरे के भावों ने उन्हें हिंदी सिनेमा का एक जीवंत आइकॉन बना दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया गहरा शोक,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असरानी के निधन पर शोक जताते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा,
“गहरा दुख हुआ। असरानी जी एक प्रतिभाशाली कलाकार थे जिन्होंने अपनी बहुमुखी भूमिकाओं से लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाई।
उन्होंने दशकों तक मनोरंजन की दुनिया में अपनी छाप छोड़ी और हमेशा याद किए जाएंगे।”
प्रधानमंत्री ने आगे लिखा कि असरानी का योगदान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने भारतीय हास्य संस्कृति को नई पहचान दी।
अमित शाह और बॉलीवुड का भावुक विदाई संदेश
गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा,
“असरानी जी ने अपने जीवन को अभिनय के माध्यम से लोगों को खुशियाँ देने में समर्पित कर दिया।
उनका जाना भारतीय सिनेमा के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उनके परिवार को शक्ति दे।”
फिल्म जगत के तमाम सितारों — अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, और जॉनी लीवर — ने भी असरानी के निधन पर दुख व्यक्त किया।
जॉनी लीवर ने लिखा, “हमने अपने कॉमेडी के गुरु को खो दिया है। असरानी जी जैसे कलाकार बार-बार नहीं आते।”
अंतिम संस्कार और परिवार
असरानी का अंतिम संस्कार मुंबई के सांताक्रूज श्मशान घाट में किया गया, जहां परिवार, मित्रों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी कई हस्तियाँ उन्हें अंतिम विदाई देने पहुँचीं।
उनके मैनेजर बाबूभाई थीबा ने बताया कि अभिनेता का निधन सोमवार दोपहर 3 बजे आरोग्य निधि अस्पताल, जुहू में हुआ।
वे अपने पीछे पत्नी, बहन और भांजे को छोड़ गए हैं।
अमर रहेगा असरानी का हँसी भरा सफर
‘हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं’ जैसे डायलॉग आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।
उनकी उपस्थिति ने हर फिल्म में जान डाल दी, चाहे वह कॉमेडी हो या इमोशनल ड्रामा।
असरानी का जीवन भारतीय सिनेमा के उस दौर की याद दिलाता रहेगा जब अभिनय केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक कला हुआ करती थी।
उनका जाना एक युग के अंत के समान है — मगर उनके किरदार, उनकी हंसी और उनकी ऊर्जा हमेशा जीवित रहेंगे।
भारतीय सिनेमा हमेशा असरानी को सलाम करता रहेगा।





