नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2025:
भारत का चुनाव आयोग (ECI) सोमवार को देश व्यापी विशेष मतदाता सूची निरक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के पहले चरण की तारीखों की घोषणा करेगा। इस चरण में करीब 10 से 15 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल होंगे, जिनमें भारत के प्रमुख राज्य पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी जैसे चुनावी केंद्रशासित प्रदेश भी रहेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, जिन राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव जनवरी 2026 तक होने हैं, जैसे महाराष्ट्र, उन्हें इस इस पहले चरण से बाहर रखा गया है या रखा जाएगा। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और लद्दाख जैसे बर्फीले क्षेत्रों में भी फिलहाल यह प्रक्रिया नहीं होगी। पूरे देश में आखिरी बार मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण लगभग 20 साल पहले किया गया था।
चुनाव आयोग पर राजनीतिक आरोप और प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि पार्टी मतदाता सूची से नाम हटाने की साज़िश कर रही है। उन्होंने कहा कि “बिहार में भी इसी तरह लाखों मतदाताओं को वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया था।”
डीएमके और अन्य INDIA गठबंधन दलों के विभिन्न नेताओं ने भी दावा किया कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग का इस्तेमाल “राजनीतिक लाभ” अपने स्वार्थ के लिए कर रही है। स्टलिन ने कहा, “अगर कामकाजी वर्ग, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और गरीब तबकों के नाम सूची से हटाए जाते हैं, तो बीजेपी और उसके सहयोगी चुनाव जीतना आसान समझते हैं। लेकिन तमिलनाडु में ये कोशिश सफल नहीं होगी हम ये होने नहीं देंगे।”
ECI की पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए घोषणा
बिहार की तरह आदेश जारी करने के बजाय इस बार ECI प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से SIR योजना की घोषणा करेगा, ताकि मीडिया और राजनीतिक दल सीधे सवाल पूछ सकें और किसी भी संदेह को तुरंत दूर किया जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, यह अभियान तीन चरणों में चलेगा।
- पहले चरण में वे राज्य शामिल होंगे जहाँ सर्दी का असर कम रहेगा।
- दूसरे चरण में वे राज्य आएंगे जहाँ अगले कुछ महीनों में स्थानीय चुनाव प्रस्तावित हैं।
- तीसरे चरण में वे राज्य होंगे जहाँ पहले से 75-80% मतदाताओं का डेटा पिछले पुनरीक्षण से जोड़ा जा चुका है।
बाकी 20% लोगों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ जमा करने होंगे, जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 326 में तय है।
दस्तावेज़ जमा करने का समय – सारिणी
ECI सूत्रों ने बताया कि मतदाता बनने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ों की सूची बिहार की तरह ही होगी, यह केवल “संकेतांक” होगी, यानी मतदाता अन्य वैध दस्तावेज़ समय के दरम्यान भी दे सकते हैं।
आधार कार्ड केवल पहचान प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाएगा।
अगर बिहार जैसी समय-सारिणी अपनाई गई, तो पहले चरण का नामांकन 1 नवंबर से शुरू होकर जनवरी के अंत या फरवरी की शुरुआत तक चलेगा। इस दौरान आपत्तियों और दावों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
चुनाव आयोग की तैयारियों का अंतिम चरण
चुनाव आयोग इस देशव्यापी पुनरीक्षण की तैयारी पिछले दो महीनों से कर रही है। सितंबर और अक्टूबर में चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) की दो बैठकों में समीक्षा की। 22-23 अक्टूबर की बैठक में आयोग ने राज्यों की तैयारियों का पूरा आकलन किया।
बिहार में हाल ही में पूरा हुआ SIR अब एक मॉडल के रूप में काम करेगा। चुनाव आयोग को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से मतदाता सूची अधिक साफ, सटीक और त्रुटि-मुक्त बनेगी। इसमें मृत, स्थानांतरित या दोहराए गए नाम हटाए जाएंगे। और कोई अतथ्य आरोप नहीं होंगे।
सभी राज्यों की मतदाता सूचियाँ अब डिजिटल रूप से जुड़ चुकी हैं, और 50-70% मतदाताओं का डेटा पहले से लिंक किया जा चुका है। बूथ लेवल अफसरों को प्रशिक्षण दिया गया है और राजनीतिक दलों से पर्याप्त बूथ एजेंट नियुक्त करने का आग्रह किया गया है। एकंदरीत कहे तो चुनाव आयोग ने इस बार जोरदार तैयारी की है।





