पाकिस्तान और अफगानिस्तान

कतर में बातचीत की मेज़ पर पहुंचे पाकिस्तान और अफगानिस्तान — सीमा पर एक हफ्ते की हिंसा के बाद सुलह की कोशिश

दोहा, 18 अक्टूबर 2025:
लगातार बढ़ते सीमा तनाव और कई दिनों की घातक झड़पों के बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने शनिवार को कतर में शांति वार्ता शुरू की। इस चर्चा का मकसद है — सीमा पर जारी हिंसा को थामना और दोनों देशों के बीच फिर से संवाद का रास्ता खोलना।

तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि अफगान प्रधानमंत्री हसन अखुंद ने मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से बातचीत के दौरान पुष्टि की कि “वार्ता औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है।” अनवर इब्राहिम इस तनाव में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और उन्होंने दोनों पक्षों से कहा है कि “सैनिक कार्रवाई के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता दें।”

इससे पहले शुक्रवार को काबुल ने पाकिस्तान पर 48 घंटे की युद्धविराम संधि तोड़ने का आरोप लगाया था। अफगानिस्तान के दक्षिण-पूर्वी प्रांत पक्तिका में हुए हवाई हमलों में कम से कम 10 नागरिकों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे और तीन स्थानीय क्रिकेट खिलाड़ी भी शामिल थे।

पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, ये हमले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े उग्रवादियों को निशाना बनाकर किए गए थे, जो हाल ही में पाकिस्तानी अर्धसैनिक बलों पर हुए हमले के जवाब में की गई कार्रवाई बताई जा रही है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोहा में चल रही बातचीत का मुख्य उद्देश्य है “अफगानिस्तान की भूमि से पाकिस्तान के खिलाफ होने वाली आतंकी गतिविधियों को रोकना और सीमा क्षेत्रों में स्थिरता लाना।”

इस वार्ता में पाकिस्तान की ओर से रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और खुफिया एजेंसी के प्रमुख जनरल असीम मलिक शामिल हैं, जबकि अफगानिस्तान की प्रतिनिधि टीम का नेतृत्व रक्षा प्रमुख मोहम्मद याकूब कर रहे हैं।

हालांकि कतर ने औपचारिक रूप से अपनी भूमिका पर कोई बयान नहीं दिया, मगर इस्लामाबाद ने दोहा सरकार को “मध्यस्थता के प्रयासों के लिए धन्यवाद” कहा है।

तनाव की जड़ में सुरक्षा का मुद्दा

सीमा पर जारी तनाव की सबसे बड़ी वजह सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं हैं। पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान की जमीन पर टीटीपी जैसे आतंकी संगठनों को पनाह मिल रही है, जबकि काबुल इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है।

सीमा संघर्ष की शुरुआत 11 अक्टूबर को उस वक्त हुई, जब अफगान विदेश मंत्री अमीर मुत्ताकी की भारत यात्रा के कुछ ही दिनों बाद काबुल में विस्फोटों की एक श्रृंखला ने हालात बिगाड़ दिए। इसके बाद अफगान बलों ने दक्षिणी सीमा पर कई मोर्चों से जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिस पर पाकिस्तान ने हवाई हमलों की चेतावनी दी थी।

लोगों में डर, लेकिन उम्मीद भी

पक्तिका के स्पिन बोल्दक क्षेत्र के मंत्री सादुल्लाह तोर्ज़ान ने बताया, “फिलहाल हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन लोग अब भी डरे हुए हैं। सबको डर है कि फिर से गोलीबारी शुरू न हो जाए।”

इस बीच ईरान ने भी दोनों देशों के बीच सुलह में मदद की पेशकश की है। तेहरान के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि “अगर यह संघर्ष नहीं रुका, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर पड़ेगा।”

वहीं तालिबान ने अपनी सेनाओं को फिलहाल संयम बरतने का आदेश दिया है। ज़बीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,

“वार्ता दल के सम्मान और राष्ट्रीय गरिमा को बनाए रखने के लिए हमने अस्थायी रूप से गोलीबारी रोक दी है।”

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