भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) एक बार फिर सुर्खियों में है। सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि कंपनी ने हाल ही में 80,000 कर्मचारियों की छंटनी की है और उन्हें अलग-अलग प्रकार के सेवरेंस पैकेज दिए गए हैं।
हालाँकि, कंपनी ने इस दावे को पूरी तरह से “भ्रामक और गलत” करार दिया है।
अफ़वाहों की शुरुआत कैसे हुई?
कई यूज़र्स ने X (पूर्व में ट्विटर) और अन्य प्लेटफ़ॉर्म्स पर लिखा कि कुछ कर्मचारियों को 18 महीने तक का वेतन पैकेज मिला, जबकि कई को केवल 3 महीने का सेवरेंस मिला।
वहीं, कुछ कर्मचारियों ने यह भी शिकायत की कि उन्हें किसी तरह का पैकेज नहीं दिया गया।
इन पोस्ट्स ने तेजी से वायरल होकर 80,000 नौकरी कटौती की ख़बर को हवा दी।
TCS की आधिकारिक प्रतिक्रिया
कंपनी ने साफ कहा है कि 80,000 नौकरियों की कटौती की ख़बर में कोई सच्चाई नहीं है।
TCS के मुताबिक़, छंटनी का असर उनकी कुल वर्कफ़ोर्स का लगभग 2% पर पड़ा है।
आधिकारिक रिपोर्ट्स के अनुसार, यह संख्या करीब 12,000 कर्मचारियों के आसपास है — जो कंपनी के इतिहास में सबसे बड़ी छंटनी मानी जा रही है।
कर्मचारियों की शिकायतें
प्रभावित कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि HR विभाग दबाव बनाकर रेज़िग्नेशन ले रहा है, ताकि सीधी टर्मिनेशन की छवि से बचा जा सके।
कई लोगों को केवल कुछ हफ़्तों का नोटिस मिला, जिससे अचानक नौकरी खोने का झटका और गहरा हो गया।
आईटी सेक्टर की यूनियनों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है और कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार की अपील की है।
उद्योग पर असर
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह छंटनी केवल लागत घटाने तक सीमित नहीं है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल के कारण भी कंपनियों को अपनी कार्यबल रणनीति बदलनी पड़ रही है।
TCS जैसी बड़ी कंपनियों के कदम से पूरे भारतीय आईटी सेक्टर में अनिश्चितता और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
80,000 छंटनी का दावा भले ही सोशल मीडिया पर फैल रहा हो, लेकिन अब तक कोई ठोस सबूत इसकी पुष्टि नहीं करता।
TCS की आधिकारिक घोषणा के आधार पर वास्तविक संख्या लगभग 12,000 कर्मचारियों की है।
यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में आईटी क्षेत्र में नौकरी की सुरक्षा पर तकनीकी बदलाव और आर्थिक दबाव का गहरा असर देखने को मिल सकता है।





