05 नवंबर 2025 | मुंबई: दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल करेंसी Bitcoin एक बार फिर बड़ी गिरावट के दौर से गुजर रही है। बुधवार को बिटकॉइन की कीमत 1 लाख डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई, जिससे पूरे क्रिप्टो बाजार में बिकवाली और घबराहट का माहौल फैल गया है। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब निवेशक वैश्विक आर्थिक संकेतों और अमेरिकी बाजार की नीतियों को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
जोखिम से दूरी बना रहे निवेशक
पिछले कुछ महीनों में निवेशकों की प्राथमिकता सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ी है। डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में मजबूती के कारण जोखिम वाले एसेट्स जैसे कि क्रिप्टो करेंसी की मांग घट रही है।
क्रिप्टो एक्सचेंज विशेषज्ञों का कहना है कि कई संस्थागत निवेशकों ने लाभ बुकिंग शुरू कर दी है, जिससे बाजार पर और दबाव बन गया है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि क्रिप्टो बाजार फिलहाल “risk-off mode” में है, जहां निवेशक किसी भी अनिश्चितता के दौरान अपना पैसा बचाने पर ध्यान दे रहे हैं।
ईथर और ऑल्टकॉइन पर भी गहरा असर
बिटकॉइन के साथ-साथ दूसरी बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ether (ईथर) में भी भारी गिरावट देखी गई। ईथर की कीमत 15% तक फिसल गई, जबकि कई छोटे Altcoins (ऑल्टकॉइन) — जिनका ट्रेडिंग वॉल्यूम सीमित है — इस साल अब तक 50% से ज्यादा गिर चुके हैं।
Cardano, Solana, और Avalanche जैसे टोकन पर भी बिकवाली का दबाव बना रहा। बाजार के जानकारों का कहना है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ गया है, खासकर उन टोकनों में जिनकी वैल्यू फंडामेंटली कमजोर है।
बिटकॉइन की गर्मियों की रैली अब ठंडी
पिछली गर्मियों में जब बिटकॉइन 1.4 लाख डॉलर के करीब पहुंच गया था, तब क्रिप्टो समर्थकों को उम्मीद थी कि यह एक नई बुल रैली की शुरुआत होगी। लेकिन अक्टूबर से बाजार ने फिर करवट ली और अब बिटकॉइन ने वह पूरा मुनाफा खो दिया है।
Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट बताती है कि बिटकॉइन की रैली टिकाऊ नहीं थी और निवेशक अभी भी पुराने उतार-चढ़ाव से उबर नहीं पाए हैं।
आर्थिक संकेतकों का भी दबाव
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, ब्याज दरों की अनिश्चितता और डॉलर इंडेक्स में मजबूती — इन सभी कारकों ने बिटकॉइन पर दबाव बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था स्थिर नहीं होती, तब तक क्रिप्टो बाजार में स्थायित्व की उम्मीद करना मुश्किल होगा।
वहीं, एशियाई बाजारों में भी इसका असर दिखा — भारत और सिंगापुर जैसे देशों में क्रिप्टो ट्रेडिंग वॉल्यूम 10-15% तक घट गया।
भारत में निवेशकों की स्थिति
भारत में क्रिप्टो निवेशकों के लिए यह गिरावट मनोवैज्ञानिक झटका साबित हो रही है। पिछले साल जब बिटकॉइन ने रिकॉर्ड स्तर छुआ था, तब लाखों नए निवेशक इस बाजार में आए थे।
अब, उनमें से कई अपने पोर्टफोलियो में भारी नुकसान झेल रहे हैं।
एक मुंबई-स्थित क्रिप्टो विश्लेषक के अनुसार, “जो निवेशक 2024 में ऊंचे दाम पर बिटकॉइन खरीद चुके हैं, वे अब या तो नुकसान सह रहे हैं या होल्ड करने पर मजबूर हैं।”
हालांकि कुछ लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स का मानना है कि यह गिरावट एक स्वस्थ सुधार (correction) हो सकती है और लंबे समय में बिटकॉइन फिर से उभर सकता है।
बाजार विश्लेषकों की राय
क्रिप्टो बाजार के वरिष्ठ विश्लेषक माइकल एडवर्ड्स ने कहा —
“वर्तमान माहौल में निवेशक जोखिम नहीं लेना चाहते। फेडरल रिजर्व की कड़ी मौद्रिक नीति, महंगाई और डॉलर की मजबूती ने बिटकॉइन की आकर्षण क्षमता को कम किया है।”
उन्होंने आगे जोड़ा कि यह दौर अस्थायी हो सकता है, लेकिन निकट भविष्य में क्रिप्टो में वोलैटिलिटी जारी रहेगी।
अगला स्तर और भविष्य की उम्मीद
टेक्निकल एनालिस्ट्स के मुताबिक, बिटकॉइन का अगला सपोर्ट लेवल $92,000 और रेजिस्टेंस लेवल $108,000 के आसपास है।
अगर कीमत $90,000 से नीचे जाती है तो और गहरी गिरावट देखी जा सकती है।
हालांकि, कुछ निवेशक इसे खरीदारी का मौका भी मान रहे हैं।
उनका मानना है कि जैसे ही बाजार स्थिर होगा, बिटकॉइन धीरे-धीरे रिकवरी दिखा सकता है — लेकिन फिलहाल सतर्क रहना ही सही रणनीति होगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, क्रिप्टो बाजार एक बार फिर अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुका है।
बिटकॉइन की कीमत का 1 लाख डॉलर से नीचे आना यह साफ संकेत देता है कि अभी इस बाजार में भरोसे की कमी है।
जब तक वैश्विक जोखिम कारक और नीतिगत स्पष्टता नहीं आती, तब तक निवेशकों को इस बाजार में सावधानी से कदम रखना होगा।





