Women’s World Cup Final 2025

हरमनप्रीत कौर बोलीं – अब वक्त है जीत का | Women’s World Cup Final 2025

टीम इंडिया का जोश बरकरार, कप्तान हरमनप्रीत ने कहा – “अब वक्त है जीत का”

गुवाहाटी में जब गायिका श्रेया घोषाल ने राष्ट्रगान गाया, तब कप्तान हरमनप्रीत कौर ने आँखें बंद कर, पूरे मन से हर शब्द दोहराते हुए वह पल जीया।

वहीं कोलंबो में एक छोटे से वालंटियर को जब तय खिलाड़ी की तबीयत खराब होने के कारण मंच पर जाने का मौका लगभग हाथ से निकल गया, तो हरमनप्रीत ने खुद पहल की – मुस्कुराते हुए उसका हाथ थामा और दोनों बच्चों के साथ मैदान में कदम रखा।

एक बदली हुई कप्तान, नई सोच के साथ

नवी मुंबई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले उन्होंने कुछ ऐसा किया जो शायद ही किसी कप्तान ने किया हो — उन्होंने टीम की ‘हडल’ एक छोटी बच्ची को सौंप दी, ताकि वह खिलाड़ियों को प्रेरित कर सके।

यह हरमनप्रीत की उस नई नेतृत्व शैली की झलक थी, जिसमें अब वह सख्त कप्तान के साथ-साथ एक इंसानी जुड़ाव वाली नेता बन चुकी हैं।

आँसुओं में छिपा सफर

सेमीफाइनल जीतने के बाद हरमनप्रीत की आँखों से निकले आँसू सिर्फ खुशी के नहीं थे — वो उन वर्षों का भावनात्मक सफर थे जब 2017 के बाद कई बार टीम मंज़िल के करीब आकर ठहर गई थी।

उस वक़्त उनकी खुद की पारी ने ऑस्ट्रेलिया को पछाड़कर इतिहास रचा था, और आज वही टीम जेमिमा रोड्रिग्स की शानदार इनिंग से फाइनल में पहुँची है। हरमनप्रीत के लिए यह न सिर्फ जीत, बल्कि एक नई पीढ़ी को मशाल सौंपने का क्षण भी है।

फाइनल से पहले कप्तान का बयान

फाइनल की पूर्व संध्या पर हरमनप्रीत ने मुस्कुराते हुए कहा,

“अब तो टिकटों की इतनी डिमांड है कि हमें भी मैनेज करने में पसीना आ रहा है। ये अच्छा संकेत है – इसका मतलब है कि लोग अब महिला क्रिकेट को उतना ही प्यार दे रहे हैं जितना यह हक़दार है।”

डी.वाई. पाटिल स्टेडियम के बाहर टिकट लेने वालों की लंबी कतारें इसका सबूत हैं।

टीम की मानसिक तैयारी

हरमनप्रीत ने बताया कि सेमीफाइनल के बाद टीम ने सबसे ज़्यादा ध्यान रिकवरी और मानसिक ताज़गी पर दिया।

“हम कई सालों से मेहनत कर रहे हैं। अब तकनीक नहीं, मानसिक रूप से तैयार रहना ज़रूरी है। अगर हम शांत और फोकस्ड रहे, तो फाइनल हमारे नियंत्रण में रहेगा।”

“तीन हारों ने हमें गिराया नहीं, मजबूत बनाया”

भारत ने टूर्नामेंट के बीच तीन करीबी मैच हारे थे — लेकिन कप्तान के शब्दों में,

“हम कभी टूटे नहीं। हर हार के बाद हम एक साथ खड़े रहे। टीम में जो सकारात्मक सोच है, वही हमें यहाँ तक लाई है।”

उन्होंने कहा कि टीम ने हर गलती से सीखा, सुधार किया और हर बार एकजुट होकर वापसी की।

“घर में वर्ल्ड कप खेलना भावनात्मक है”

हरमनप्रीत ने स्वीकार किया कि घरेलू मैदान पर खेलना उत्साह के साथ भावनात्मक दबाव भी लाता है,

“ऐसे वक्त में खुद को संतुलित रखना सबसे बड़ी कला है। हम फोकस और रिलैक्स दोनों बने रहने की कोशिश कर रहे हैं। ये हमारे जीवन का सबसे बड़ा पल है, हमें इसका आनंद लेना चाहिए।”

छोटा लक्ष्य, बड़ा मकसद

टीम का फोकस फाइनल जीतने पर नहीं, बल्कि “हर छोटे कदम को सही करने” पर है।

“जब आप हर छोटे लक्ष्य को हासिल करते जाते हैं, तो बड़ी मंज़िल अपने आप पूरी हो जाती है।”

“अब जीत की बारी है”

कप्तान ने अंत में कहा,

“हम जानते हैं हार का एहसास क्या होता है, लेकिन अब वक्त है जीत को महसूस करने का। कल का दिन हमारे लिए बहुत खास होगा।”

उनकी आवाज़ में आत्मविश्वास था, और आँखों में वही चमक जो 2017 की याद दिलाती है।

हरमनप्रीत कौर और उनकी टीम न केवल फाइनल खेलने जा रही हैं, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के नए अध्याय की नींव रख रही हैं।

इस बार सिर्फ ट्रॉफी नहीं, सम्मान, पहचान और प्रेरणा दांव पर है।

और अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा — तो आने वाला कल भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।

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